Web Hosting India - Hosting for as low as Rs.499 per year. Free
Sitebuilder to create your site instantly.
Read Shayaris at
Shayari Club
|
अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
|
| Author |
Message |
obstinate.obstinate
Junior Member
 
Posts: 3
Group: Registered
Joined: Dec 2010
Status:
Offline
Reputation: 0
|
अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे जिद्दी हैं परिंदे के उड़ा भी न सकूँ
फूँक डालूँगा किसी रोज ये दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है कि जला भी न सकूँ
मेरी गैरत भी कोई शय है कि महफ़िल में मुझे
उसने इस तरह बुलाया है कि जा भी न सकूँ
इक न इक रोज कहीं ढ़ूँढ़ ही लूँगा तुझको
ठोकरें ज़हर नहीं हैं कि मैं खा भी न सकूँ
फल तो सब मेरे दरख्तों के पके हैं लेकिन
इतनी कमजोर हैं शाखें कि हिला भी न सकूँ
Rahat Indori
|
|
| 04-19-2011 07:52 PM |
|
 |
for free. Upload you images and share with friends now.