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आँखों में अश्क ..........
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Panna
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Joined: May 2009
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आँखों में अश्क ..........
आँखों में अश्क ..........
आँखों में अश्क आये जाते हैं , िफर भी हम मुस्कुराये जाते हैं ,
गाना तो आता नहीं हैं , िफर भी हम गुनगुनाये जाते हैं !
संभल के चलते हैं िदल अपना , कहीं कोई तोड़ न दे ,
बेवफाई से भरी दुिनया में , हम वफ़ा िकये जाते हैं !
दुिनया हँसती है हम पर , हमें कोई ऐतराज नहीं,
रोते हुए िदलों को भी हम हँसाए जाते हैं!
टूट गए सारे सपने पल भर में शीशे की तरह ,
िफर भी दूसरों के िलये , हम सपने सजाये जाते हैं!
सारी िजंदगी अंधरे में िबता दी हमने ,
जाते-जाते औरों के िलये दीये जलाये जाते हैं!
रास्ते ही नहीं है जब , मंिजलों की तो आस िकसे ,
रास्तों की तलाश में , हम काटों पर चले जाते हैं !
सूनी पड़ी है राहें िदल की , कोई मुसािफर नहीं राहों में ,
सूनेपन को साथ में लेकर , हम राहों से गुजरते जाते हैं!
प्यास इतनी प्यास है िक , अब तक बुझी नहीं,
पानी तो कहाँ नसीब में , अब तो अश्कों को ही पीये जाते हैं !
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| 08-02-2009 10:05 PM |
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