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उसी में वकत का सारा हिसाब लिख्खा हैं
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Message |
Joshi
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Joined: Dec 2008
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उसी में वकत का सारा हिसाब लिख्खा हैं
हमारे दिल पे जो झखमों का बाब लिखा हैं
उसी में वकत का सारा हिसाब लिख्खा हैं.
कुछ और काम तो हम से न हो सका लेकिन
तुम्हारे हिज्र का एक एक अजाब लिख्खा हैं.
सुलूक निश्तारों जैसा ना कीजिये हमसे
हमेशा आप को हम ने गुलाब लिख्खा हैं.
तेरे वजूद को महसूस उम्र भर होगा
तेरे लबों पर जो हम ने जवाब लिख्खा हैं.
हुआ फस्साद तो उसमे नहीं किसी का कसूर
हवा- ऐ -शहर ने मौसम खराब लिख्खा हैं.
अगर यकीं नहीं तो उठाइए तारीख
हमारा नाम बसद आब-ओ-ताब लिख्खा हैं.
-मंज़र भोपाली[/size]
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| 12-31-2008 02:29 PM |
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